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why are the festival Holi?
होली का त्यौहार क्यों मनाते हैं और किस लिए मनाते हैं?
कारण अवश्य जानिए:- पुराणों से निष्कर्ष निकला है कि सतयुग से यह प्रथा चली आई भगवान विष्णु के पिता हिरण्यकश्यपु थे, उत्तर प्रदेश में इक स्थान है जो हरदोई जिला पड़ता है, और वहां के रहने वाले थे, उस सतयुग में हिरण्यकश्यपु पूरी पृथ्वी का राजा था। और हमें पुराणों से ही मालूम हुआ कि हिरण्यकशिपु ब्रह्मा जी की उपासना करता था और सिद्धि प्राप्त किए हुए एक महान विद्वान राजा भी माना जाता था और उस समय सतयुग का राजा था।
पुत्र भक्त पहलाद विष्णु भगवान की स्तुति करता था भक्त पहलाद का मकसद था भगवान को पाना।
📙रिसर्च फाउंडेशन साइंस के अनुसार सतयुग में भी कई पीढ़ियां बीत गई और जैसे-जैसे मानव बढ़ता गया आध्यात्मिक ज्ञान लुप्त होता गया, भक्त पहलाद भगवान है विष्णु को पाने के लिए जैसे ही भक्त प्रहलाद के अध्यात्मिक मार्ग भक्ति गुरु मिले उन्होंने जैसे ही बताया उस अनुसार भक्ति करते थे, लेकिन भक्त पहलाद की भक्ति से वह सुख मिला जो आम समाज को नहीं मिल सकता है क्योंकि अध्यात्मिक तत्व बिल्कुल इस कलयुग में कम हो गया और आज ही 20% रह चुका है।
भक्त प्रहलाद का पिता हिरण्यकशिपु भक्त प्रहलाद की भक्ति से जलकर षड्यंत्र रचा इसकी भक्ति नष्ट करा दी जाए ताकि यह प्रभु प्राप्त न हो सके जिसका कारण hiranyakashipu का अहंकार था, और उसने अपनी बहन से कहकर अपने साथ बैठाकर आग के हवाले कर दिया और भक्ति की शक्ति से भक्त पहलाद का शेष शरीर बच गया और बहन होलिका जल गई यह पुराणों से सत्य कथा का प्रमाण मिलता है।
लाभ भक्ति से क्या है। ?
सतयुग की जिंदगी गीता अनुसार देखी जाए तो कलयुग की अपेक्षा 432000 से 4 गुना अधिक 17 लाख 28 हजार वर्ष थी और इसको 1000 चतुर्युग कहा गया है। जब ब्रह्मा जी को वेदों से कुछ मिला और उस अनुसार ब्रह्मा जी ने अपने वंशज को बताना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे यह अत्यधिक ज्ञान में फैलने लगा। ब्रह्मा जी ने ज्ञान को कितना समझा यह अनुभव ब्रह्मा जी को ही नहीं रहा फिर उनकी वंसज को कैसे हो सकता, क्योंकि श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार ब्रह्मा ,विष्णु, शंकर का जन्म और मृत्यु होता है और इनका पिता काल ब्रह्मा है जो दुर्गा का पति है यह निष्कर्ष गीता से प्रमाणित हुआ और गीता चार वेद का सारांश है 4 वेद ब्रह्म (काल) के मुख से पूर्ण परमात्मा के समय अनुसार निकले। और उसका ज्ञान श्री ब्रह्मा जी विष्णु जी और शंकर जी धीरे धीरे प्राप्त होने लगा।
सतयुग में:- विद्वानों, ॠषियो ने वेद से निष्कर्ष से ढूंढ ना पाए तो उन्होंने आधार मान लिया की प्रकृति दुर्गा सबसे बड़ी है और इसकी पूजा करनी चाहिए और आज तक लोग इस क्रिया तक करते हुए छोटे-छोटे मंदिर बना के देवी देवताओं की पूजा करते हैं जबकि गीता अनुसर
विरुद्ध साधना हुई अध्याय 16 के 23 24 में मन माना आचरण बोला है।
भक्त पहलाद एक अच्छी आत्मा थी और उसने भगवान विष्णु को प्रभु मानकर पूजा की और उसके पिता हिरकश्यपु अपने अहंकार वस उसकी पूजा साधना को बंद करना चाहा इसलिए पूर्ण प्रभू नरसिंह रूप में आकर उस हिरण्यकश्यपु का शरीर चीर डाला और मृत्यु को प्राप्त हुआ और जिस प्रकार से अहंकार में डूबा हुआ था उसका प्रभू नहीं बचा सका क्योंकि समर्थ के बिना कार्य सिद्ध नहीं होता।
अंहकार :-रुपी मन में एक विकार :-दोस्तों भक्त पहलाद भक्ति की शक्ति प्राप्त की और उसका शरीर सुरक्षित बचा और उसकी बुआ का शरीरअग्नि में स्वाहा हो चुका था इसलिए उस सम दृष्टि से देखा जाए तो भक्त पहलाद ने भक्ति करके ही समाज को दिखाया और बताया कि सभी को भक्ति करनी चाहिए लेकिन इन नकली ब्राह्मण और नकली धर्मगुरुओं के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान लुप्त होता गया और कलयुग में इस साइंस के अनुसार 20% रह चुका है।
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लाभ भक्ति से क्या है। ?
सतयुग की जिंदगी गीता अनुसार देखी जाए तो कलयुग की अपेक्षा 432000 से 4 गुना अधिक 17 लाख 28 हजार वर्ष थी और इसको 1000 चतुर्युग कहा गया है। जब ब्रह्मा जी को वेदों से कुछ मिला और उस अनुसार ब्रह्मा जी ने अपने वंशज को बताना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे यह अत्यधिक ज्ञान में फैलने लगा। ब्रह्मा जी ने ज्ञान को कितना समझा यह अनुभव ब्रह्मा जी को ही नहीं रहा फिर उनकी वंसज को कैसे हो सकता, क्योंकि श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार ब्रह्मा ,विष्णु, शंकर का जन्म और मृत्यु होता है और इनका पिता काल ब्रह्मा है जो दुर्गा का पति है यह निष्कर्ष गीता से प्रमाणित हुआ और गीता चार वेद का सारांश है 4 वेद ब्रह्म (काल) के मुख से पूर्ण परमात्मा के समय अनुसार निकले। और उसका ज्ञान श्री ब्रह्मा जी विष्णु जी और शंकर जी धीरे धीरे प्राप्त होने लगा।
सतयुग में:- विद्वानों, ॠषियो ने वेद से निष्कर्ष से ढूंढ ना पाए तो उन्होंने आधार मान लिया की प्रकृति दुर्गा सबसे बड़ी है और इसकी पूजा करनी चाहिए और आज तक लोग इस क्रिया तक करते हुए छोटे-छोटे मंदिर बना के देवी देवताओं की पूजा करते हैं जबकि गीता अनुसर
विरुद्ध साधना हुई अध्याय 16 के 23 24 में मन माना आचरण बोला है।
भक्त पहलाद एक अच्छी आत्मा थी और उसने भगवान विष्णु को प्रभु मानकर पूजा की और उसके पिता हिरकश्यपु अपने अहंकार वस उसकी पूजा साधना को बंद करना चाहा इसलिए पूर्ण प्रभू नरसिंह रूप में आकर उस हिरण्यकश्यपु का शरीर चीर डाला और मृत्यु को प्राप्त हुआ और जिस प्रकार से अहंकार में डूबा हुआ था उसका प्रभू नहीं बचा सका क्योंकि समर्थ के बिना कार्य सिद्ध नहीं होता।
अंहकार :-रुपी मन में एक विकार :-दोस्तों भक्त पहलाद भक्ति की शक्ति प्राप्त की और उसका शरीर सुरक्षित बचा और उसकी बुआ का शरीरअग्नि में स्वाहा हो चुका था इसलिए उस सम दृष्टि से देखा जाए तो भक्त पहलाद ने भक्ति करके ही समाज को दिखाया और बताया कि सभी को भक्ति करनी चाहिए लेकिन इन नकली ब्राह्मण और नकली धर्मगुरुओं के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान लुप्त होता गया और कलयुग में इस साइंस के अनुसार 20% रह चुका है।
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भक्त पहलाद के सामर्थ्य जीवन के अनुसार वर्तमान कलयुग सन 2019 अप्रैल से यह प्रतीत होता है कि इस कलयुग में वर्तमान पर पृथ्वी पर जितने प्राणी है मनुष्य रूप में इन सभी को भक्ति करनी चाहिए और एक पूर्ण ब्रह्म को पाना चाहिए जिसको देवी दुर्गा ने हिमालय पर्वत से कहा कि उसे ब्र
यह्म की पूजा करो जिसका ओम नाम मंत्र है लेकिन ने सतयुग के ब्राह्मण और कलयुग के ब्राह्मण विद्वान तत्वज्ञान हीन के कारण पूर्व परमात्मा के ज्ञान को ना समझ सके।
क्योंकि देवी दुर्गा ब्रह्म की पूजा को कहती है और ब्रह्म नाशवान है इससे बड़ा पूर्णब्रह्म है जो कभी नष्ट नहीं होता है सर्व ब्रह्मांड पूर्ण ब्रह्म के ही रचे हुए हैं।
गीता अनुसार तीन प्रभु है:- क्षर पुरुष, अक्षर पुरुष, परम अक्षर पुरुष
जिसमें अक्षर पुरुष ही पूर्ण ब्रह्म समरथ कबीर परमेश्वर वेद में प्रमाण है और गीता, बाइबिल, कुरान में प्रमाण है
भक्त पहलाद के द्वारा जो शिक्षा का महत्व मिलता है वह भक्ति से जुड़ा हुआ है लेकिन आज कलयुग में लोग मनमानी साधना करते हैं और मनाते हैं त्यौहार (पिछली याद) भक्त पहलाद की घटना से शिक्षा का महत्व मिलता है वह भक्ति से जुड़ा हुआ है, लेकिन आज के युग में लोग मन माना आचरण करते हैं और मनाते हैं त्यौहार इ देखें वीडियो में पुस्तक प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप पर जरूर SMS करें।
कॉलेज, सचिवालय ,लोकतंत्र, ब्लॉक, सदन, पंचायत ,कचेहरी हुकुमत और जितने भी दफ्तर है सभी के लिए यह ब्लॉग से संदेश पूर्ण परमात्मा तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का।।
नोट:-भक्त पहलाद के द्वारा जो होलिका बहन का संदेश था वह भक्ति युक्त था और इस भक्ति युक्त संदेश से पान ,मसाला बीड़ी, सिगरेट ,दहेज खत्म होने चाहिए कि हमारा समाज डगमग होने से बचें।
लोग अपने स्वार्थ के लिए अपने मन की पूर्ति के लिए दूसरे जीव का मांस खाते हैं ,गाय, भैंस ,बकरी ,मुर्गी आदि लेकिन शास्त्रों के अनुसार गलत है भगवान के संविधान को तोड़ रहे हैं।
१-शराब पीकर अश्लील गाली गलौज करते हैं।।
इसलिए आज कलयुग में भक्ति करना बहुत ही अनिवार्य है📙📙🙇🙇
२-दहेज एक अभिशाप बन गया है बहन बेटी की इज्जत नहीं हो रही है और इस नियम को बंद करें✍️✍️
शराब के लाइसेंस रद्द किए जाएं ✍️✍️
Satlok Ashram News blog ✍️✍️
🙇🙇
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